RSS

01 Mar

किसीने छूके मुझे अपना कहाँ रख्खा है ?
जैसे अपने ही साँसो में सजा रख्खा है.

मिले तो ऐसे की जैसे हवा से फूल खिले
कहीसे बहते हुए झरनेमें तपती घुप मिले.
जैसे अपने ही चाहतमें कैद बना रख्खा है.

हमारा होश यूँ दिन रात जवां रख्खा है
किसीने छूके मुझे अपना कहाँ रख्खा है ?

कभी खयालोंमे,कभी सामने वो आता है
कभी सरगोसी से दिलको भी छेड़ जाता है
जैसे अपने ही प्यारमें सदा बसा रख्खा है

हमें ही नूर कभी मुजरिम बना रख्खा है
किसीने छूके मुझे अपना कहाँ रख्खा है ?
जैसे अपने ही साँसो में सजा रख्खा है
रेखा पटेल (विनोदिनी)✍🏼img_1356

Advertisements
 
1 Comment

Posted by on March 1, 2017 in Uncategorized

 

One response to “

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: