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मेरी माँ

19 Apr

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माँ से रिश्ता ऐसा बनाया जाए,
अगर वो हो उदास तो
हमसे भी मुस्कुराया ना जाए.
माँ ” एक शब्द …..
जानते हो माँ एक शब्द क्यों है ?
जब बच्चा छोटा हो तो उसे बोलने में तकलीफ ना हो ,और वोही बच्चा जब बड़ा हो जाये,और जब उसके पास टाइम ना हो तब एक सब्द अपनी मसरूफ जिंदगी में सायद वो बोल दे और माँ के दिल को सुकून मिल जाये .
माँ तो बस माँ होती हैं जाडे की वो नर्म धूप है
माँ तो बस माँ होती हैं तेज़ धूप पर वो छाँव है

आज यूँ ही बैठे बैठे आंखे भर आई वैसे ही कोई बात याद आई
आज मेरा अपना एक नया संसार है में खुद माँ का अवतार हु तब आज महेसुस होता है दुनियामे सबसे ज्यादा महत्त्व किसीका है तो वो माँ है,
वो कभी जताती नहीं पर उसका अहेसान आप पर सबसे भारी है।
हम वो अहेसान कभी उतार नहीं सकते
पर कुछ हद तक उसे अपना समय देकर चूका सकते है।
माँ अपनी ढलती उम्रमे बच्चोसे थोडा प्यार और थोडा समय चाहती है।
अपने दिल पर हाथ रखकर बताना आप 24 घंटे में से माँ को कितने पल देते हो
जब ये समज आयेगा तो सायद देर हो जायेगी
तब माँ ना होगी सिर्फ समय रह जायेगा
वो समय जो आपको उसी कोने में बिठाने के लिए खड़ा होगा जहा आपने माँ को अकेला छोड़ा था

क्या किसीको पता है इसी बात का की बच्चा जब माँ के पेटमे साँसे लेता है तो वो साँसे माँ की है,वो जोभी खाता है वो माँ का खाना है. ओर सबसे बड़ी बात के नौ दस महीने वाला गर्भ भी बड़ो की तरह मलमूत्र त्याग करता है वो अपना गन्दा कचरा माँ के पेट में छोड़ता है.

सोचने वाली बात है की उसी जननी जब अपने शरीर से लाचार होती है तो वोही औलाद को पुराणी बिना मतलब की चीज लगती है। धिक्कार है उन सभी औलादों को जो ये मुकाम पर जा बेठे है
माँ अपने बच्चों की जिंदगी संवारने में खुद को भूल जाती है, अपना सब कुछ दाँव पर लगा देती है..
हम माँ के कृत्य को निःस्वार्थ बताते है लेकिन हर माँ की एक आस जरुर रहेती है
जिसने अपने बच्चो को इतने प्यार से पाल पोष कर बड़ा किया है वो बुढ़ापे में वो इनकी सेवा करे, जब वो जीवन की राह में अकेली हो बिना जीवन साथी के तब वोही बच्चे उसका तन और मन से सहारा बने, तो इसमे गलत क्या है
माँ की ममता तो असीमित है,
तो उनके लिए हमारा आदर प्रेम सिर्फ मघर्स डे या फिर फिर बर्थ डे के लिए सीमित रहे ये योग्य होगा ?
हम चाहे तो हर दिन को अपनी माँ ले लिए महत्वपूर्ण बना सकते हैं,
माँ की ममता को याद कर, उनके दिए साथ को कभी ना भूलाकर हम उन्हें दिन के कुछ लम्हों में शामिल करके उनका हर दिन खास बना सकते हैं।
एक छोटा अहसास दिलाकर कि – ‘ माँ, जिस तरह आपने मेरे जीवन की हर कठिन राह पर मेरा साथ दिया बस मैं भी उसी तरह हर कदम पर आपके साथ हूँ
अगर माँ आपके साथ रहेती है तो दिन ढले एक बार जरुर सोचना के माँ के लिए मैंने आज क्या किया , अपना आइना आप बनना .
अगर सही मायने में आप अच्छे इन्सान बनना चाहते हो तो शुरुवात यही से होती है

आज मेरी माँ का जन्मदिन है
में आज अपनी ये सारी लिखावट मेरी माँ को अर्पण करती हु ,जिसके दिए हुए अच्छे संस्कारो ने जीवन में उजाला किया है,आज भी उसी माँ का आशीर्वाद है की में यहाँ आप सबके बीच रहेकर खुशीयाँ बाट रही हु .
बस दुआ करना मेरी माँ को उनके हिस्से की साडी खुशिया मिले
रेखा ( सखी) 4/11/13

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1 Comment

Posted by on April 19, 2013 in Uncategorized

 

One response to “मेरी माँ

  1. Jaymini Patel

    May 7, 2013 at 3:56 pm

    Beautiful,great honor for mom.

     

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